Friday, September 9, 2016

ShriLaxmiprad ShriGanapati Stotra श्रीलक्ष्मीप्रद श्रीगणपति स्तोत्रम्


ShriLaxmiprad ShriGanapati Stotra 
ShriLaxmiprad ShriGanapati Stotra is in Sanskrit. It is said in the stotra that who recites this stotra is blessed with wealth and Goddess Laxmi stays in his house forever. Devotee is praising God Ganapati, calling him by his pious names and describing his good qualities by which God blesses him.
श्रीलक्ष्मीप्रद श्रीगणपति स्तोत्रम्
ॐ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने ।
दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ॥ १ ॥
लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् ।
अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ॥ २ ॥  
ॐ हृॉं हृीं ह्रूँ हृैं हृौं हृः हेरम्बाय नमो नमः ।
सर्वसिद्धिप्रदोऽसि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भव ॥ ३ ॥ 
चिन्तितार्थप्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः ।
सिन्दूरारुणवस्त्रैश्र्च पूजितो वरदायकः ॥ ४ ॥
इदं गणपतिस्तोत्रं यः पठेद् भक्तिमान् नरः ।
तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीर्न मुञ्चति ॥ ५ ॥
॥ इति श्रीलक्ष्मीप्रद श्रीगणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
हिंदी अर्थ (श्रीगणेश-अङ्क कल्याण गोरखपुर)

सम्पूर्ण सौख्य प्रदान करनेवाले सच्चिदानन्दस्वरुप विघ्नराज गणेशको नमस्कार है  । जो दुष्ट-अरिष्टका नाश करनेवाले परात्पर परमात्मा है । जो महापराक्रमी, लम्बोदर, सर्पमय यज्ञोपवीतसे सुशोभित, अर्धन्द्रधारी और विघ्न समूहका विनाश करनेवाले हैं, उन गणपतिदेवकी मैं वन्दना करता हूँ । ॐ हृॉं हृीं ह्रूँ हृैं हृौं हृः हेरम्बको नमस्कार है । भगवन् आप सब सिद्धियोंके दाता हैं, आप हमारे लिये सिद्धि-बुद्धिदायक हों । आपको सदा ही मोदक प्रिय हैं ।  आप मनके द्वारा चिन्तित अर्थको देनेवाले हैं । सिन्दूर और लाल वस्त्रसे पूजित होकर आप सदा वर प्रदान करते हैं । जो मनुष्य भक्तिभावसे युक्त हो इस गणपति स्तोत्रका पाठ करता है, स्वयं लक्ष्मी उसके देह-गेहको नहीं छोडती ।      
ShriLaxmiprad ShriGanapati Stotra
श्रीलक्ष्मीप्रद श्रीगणपति स्तोत्रम्


Custom Search
Post a Comment