Friday, October 9, 2015

Shiv Gayatri अथ शिवगायत्री


Shiv Gayatri 
Shiv Gayatri is in Sanskrit.
अथ शिवगायत्री
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे । महादेवाय धीमहि ।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् । ॐ तत्पुरुषाय अंगुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ विद्महे तर्जनीभ्यां नमः । ॐ महादेवाय मध्यमाभ्यां नमः । 
ॐ धीमहि अनामिकाभ्यां नमः । ॐ तन्नो रुद्र कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ प्रचोदयात् करतलकरपरुष्ठाभ्यां नमः ।
अथांगन्यासः
ॐ तत्पुरुषाय हृदयाय नमः । ॐ विद्महे शिरसे स्वाहा ।
ॐ महादेवाय शिखायै वषट् । ॐ धीमहि कवचाय हुम् ।
ॐ तन्नो रुद्रः नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ प्रचोदयात् अस्त्राय फट् ।
अथ शिवगायत्रीमन्त्रः 
ॐ सं सं सं हृीं हृीं शिवाय नमः । पुनः 
ॐ शिवाय नमः ।

इति शिवगायत्री ॥
हिंदी अनुवाद 
ॐ तत्पुरुषको जानते हैं, महादेवका ध्यान करते हैं, वह रुद्र हमारी बुद्धियोंको सत्कार्यमे प्रेरणा करे । ॐ तत्पुरुषाय से अंगुष्ठ, विद्महे से तर्जनी, महादेवाय से मध्यमा, धीमहिसे अनामिका, तन्नो रुद्रः से कनिष्ठिका स्पर्श करे, प्रचोदयात् से करतल करपृष्ठ स्पर्श करे ।
अथ अंगन्यास---
ॐ तत्पुरुषाय से हृदय, विद्महे से शिर, महादेवाय से शिखा, धीमहि से कवच, तन्नो रुद्रः से नेत्रत्रय, प्रचोदयात् से अस्त्र हथेलीमें दो अंगुली ताडन करे ।
शिवगायत्रीका मन्त्र इस प्रकारसे है ।
ॐ सं सं सं हृीं हृीं शिवको प्रणाम है ।
ॐ शिवको प्रणाम है ।

इति शिवगायत्री ॥
Shiv Gayatri 
अथ शिवगायत्री



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